राजनैतिक दबाव और भ्रष्टाचार के पेंडुलम में झूलता प्रशासन समाज में स्वस्थ्य न्यायिक व्यवस्था स्थापित करने में सदैव नाकाम रहता है और उसके द्वारा लिया गया फैसला कभी भी न्यायोचित नहीं होता है
स्वार्थ और दलाली के वशीभूत होकर प्रशासन जब कोई फैसला करता है तो वह कहीं न कहीं न्यायिक प्रक्रिया पर प्रश्नचिन्ह छोड़ जाता है
सामाजिक सौहार्द संयम और न्याय व्यवस्था स्थापित करना प्रशासन की नैतिक जिम्मेदारी है
प्रशासन की घोर लापरवाही और एक पक्षी फैसला कानून व्यवस्था तथा न्यायिक प्रक्रिया से भरोसा उठाने का कारण बनता है
इसी तरह का एक मामला आगरा सदर तहसील के ग्राम पंचायत कुंडौल से संज्ञान में आया है
गांव के ही विशंभर सिंह बनाम कल्याण सिंह दुर्जन सिंह के मध्य भूमि विवाद वर्षो से न्यायालय में विचाराधीन है
कल्याण सिंह और दुर्जन सिंह ने प्रशासन अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए भारतीय News24 की टीम को बताया कि हमारा पक्ष सुने बगैर ही एक पक्षी कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने हमारी भूमिका पर अवैध कब्जा करा दिया है
भारती News24 की टीम ने मौके पर पहुंचकर विशंभर सिंह के पक्ष को जानना चाहा तो उनके साथियों ने बताया यह फैसला पूरी तरह उचित है और हम इसका स्वागत करते हैं वही कल्याण सिंह का पक्ष का कहना यह है कि संबंधित अधिकारियों ने सभी नियमों को दरकिनार करते हुए मेरी भूमि पर अवैध कब्जा करा दिया है इस विषय को लेकर में उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार लगा लूंगा और उच्च स्तरीय जांच की मांग करूंगा जिससे मुझे न्याय मिल सके
देखने वाली बात ये होगी क्या कल्याण सिंह को उचित न्याय मिल पाएगा
भारतीय News24 के लिए आरके पाठक की रिपोर्टआगरा

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